लंबे दिन रात
लंबे दिन हैं
गरम बहुत अब
लान बहुत है
पेड़ बहुत कम
रात भी छोटी
बंद हवा भी.
जब दिन था लम्बा
और गर्म था
गर रात थी लंबी और थी डंडी
पेड़ बहुत थे नदी धवल थी
अलाव बहुत थे नहीं कठिन थी.
अब मंदिर मस्जिद
गिरजे गुरूद्वारे
है बहुत यहाँ
हर चौक सडक पर.
भीड़ भी ज्यादा
भक्त नहीं कम
ईमान धर्म अब
शर्म हया भी
है बहुत कम.
बाजार बड़े सब
चमकती माल गजब की
माल है सस्ते और दौड अजब सी
कल भी यंही थी आज यहीं पर.
लोग बड़े अब
नेता और अफसर
बड़े हैं बाबू बड़े हैं दफ्तर
लोग गरीब यहाँ
सब कह्ते हरदम
बहुत काम है बाकि
बने काम बहुत कम.
बने काम जहाँ पर
जब मिले है कीमत
लोग बड़े और बड़े है दफ्तर
बड़े है नेता बड़े है अवसर.
Jaipur January 2, 2012