कब तक ?

Monday, January 2, 2012

| | |

धान-पान और सोना-मिटटी
जंगल-जीव, घास औ झाड़ी
जोर-झपट और जाल-कपट से
तुमने हमसे छीना  हथियाया
गांव गरीब का संसार उजाड़ा.

खून पसीना हमने बहाकर
रात रात भर हमने जग कर
तेरे शान-शौकत के महल बनाए
जगमग  करते शहर बसाये. 

पूजते  हो तुम सारे पत्थर
संग बीबी बच्चों के हरदम.
जाते हो तुम काबा मंदर
अमन मांगने, होने संपन्न.

दलाल स्ट्रीट और वाल स्ट्रीट पर
कब्ज़ा, साहिब, रहेगा कब तक? 
बीबी-बच्चे, गांव के हम सब
भूखे-प्यासे, नंगे बदन सब
खड़े  हुए हैं हर गली-सडक पर
हाथ  में लेकर ईंट औ पत्थर.




0 comments:

Post a Comment