चाँद का टुकड़ा
M Hasan
Jaipur March 23,
2012
चाँद का एक मासूम टुकड़ा
चाँद जैसा ही कुछ कुछ मैला
अपने बदन से बड़ा लिए हाथ में
कंधे से लटकता प्लास्टिक का थेला
आज भौर की किरण से पहले
घर की गली से निकला
लिए एक उदास चेहरा
मेरी देहलीज के पास
छोड़ एक उदासी का टुकड़ा
निकल गया चुप चाप.
आज मन बहुत उदास
अपनी ही दहलीज के पास
सुबह से बस अविराम.
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