क्रिकेट
पिच
मई
२३, २०१३ जयपुर
कभी कभी निकलता हूँ
करने लम्बी मार्निंग वाक
बशर्ते बीबी साथ हो
और मौसम भी हो साफ़।
करने लम्बी मार्निंग वाक
बशर्ते बीबी साथ हो
और मौसम भी हो साफ़।
अहो
भाग्य था आज मेरा
मिले
साधू महाराज
लिए हाथ पे हाथ वे
लिए हाथ पे हाथ वे
बैठे
थे पीपल छाँव .
थे
बैठे हुए थे पास में
मौलाना,
बेहद उदास
और
रखा हुआ था पास में
उखडा
हुआ अखबार।
किया
अदब से दोनों को
विधिवत,
नमस्कार सलाम
फिर
पूछा उनसे अदब से
मंदिर-मस्जिद
समाचार.
बोले,
मंदिर मस्जिद ठीक है
बस हमीं
बहूत परेशान।
देखा
मैंने ध्यान से
थे मोबाइल उनके हाथ
बोंले अपने आप से
ये सब आज बेकार
थे मोबाइल उनके हाथ
बोंले अपने आप से
ये सब आज बेकार
थी
लोडशेडिंग आज भी
मंदिर-मस्जिद
इक साथ
ये
भी है हम जैसे ही
फुज्ड़
और डिसचार्ज्ड! .
क्रिकेट प्रेमी दोनों थे
सबको
था ये ज्ञान
और
मंदिर-मस्जिद रोड पे
बहूत चर्चित
था
उनका याराना
व्यवहार.
व्यग्रता से बोले साधू
क्या आईपीएल के हाल?
पूछा मैंने बाबा से
होकर बहूत हैरान
साधू को क्या गरज है
क्या आईपीएल और बाज़ार?
क्या आईपीएल के हाल?
पूछा मैंने बाबा से
होकर बहूत हैरान
साधू को क्या गरज है
क्या आईपीएल और बाज़ार?
कुछ
बात पलट के बोले वो
मंदिर
में तो मंगल है
कर
रहे श्रीनाथ आराम
मस्जिद
में भी होरही
बाअमन, पाँच वक्त नमाज.
उजडे
तो हम दोनों हैं
नहीं
किस्मत का साथ!
सुन
साधू संवाद ये
हम मिंया-बीबी हैरान.
पूछा
मैंने बाबा से
आखिर
है क्या ऐसी बात
दोनों
साधू मौलाना परेशान ?
फिर
क्या था ज्ञानियों
टूटा
उनके सब्र का बांध.
साहिब,
पूजा-पाठ
प्रवचन में
की
कड़ी मेहनत दिनरात
मौलाना
ने भी देदी थी
बिन
ब्याज आधी रकम उधार
ऐसे हमने जुटाई थी
यूँ
पूंजी कुल दस लाख।
फिर
साधू रोने लगा
हो
बहुत बदहवास
और
मौलाना भी रो दिया
देख
साथी साधू हाल।.
साहिब
हम
तो लुट गए
आज
बेहिसाब
पूंजी सारी डूब गयी
आज
एक ही साथ!
अचानक
बोले गुस्से में
मौलाना
साधू साथ.
बेड़ा
गर्क इस सरकार का
और
उदंडी, सत्यानासी अखबार
पकड़े
गए श्रीसंथ जी
संग
आईपील बदमाश
बैंक, बल्ले और गेंद के
सब
पहुँच गए हवालात
कर
साधू की पिच खराब!!
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