दिन और रात में
ज़कात की फिराक में
मस्जिद में जमात में
कौम की हर बात में
हर दम यही वो कहता था
गरीब हूँ यतीम हूँ
पर कौम के करीब हूँ .
फिर एक बात और थी
तुम से और हम से वोह
यकीनन बहुत ज़हीन था.
जब कौम ने मांगी दुआ,
वो जल्द लीडर बन गया
फिर एक दिन मिनिस्टर भी हो गया
कौम का भी हौसला बुलंद बहुत हो गया.
घरवालों का भी जोर से सीना तन गया.
मालाओं, दस्तारबंदी, कोरमे की भीड़ में,
दुआ सबकी काम आई, ये वो भी कहता था.
कौम का हमदर्द था पर ज़ल्दी रंग बदल गया.
खुद फोन पहले करता था
अब फोन ही बदल लिया !
हराम और हलाल में
जुल्म और इंसाफ में
दोस्त और दलाल में
फरक ही सारा भूल गया!
केवल खुदकी धुन में
जी जान से वोह लग गया.
कौम का हमदर्द था
पक्का लीडर बन गया.
गरीब था यतीम था
वो कौम का रकीब था.
कौम का हमदर्द था
खुदगर्ज लीडर बन गया.
तुनक गया, जनाब, दिन एक
सवाल ये जो पूछ लिया
'क्या हो गया सरकार को
क्यों दंगा, जनाब, फिर हो गया?'
झुँझला के बोला जोर से, '
तो उसमें क्या हो गया?'
मैंने धीरे से कहा,
'घर बहुत सारे ज़ल गए
बेवायें कई हो गयीं
मासूम अनाथ होगये
जनाब, ये ज़ुल्म बहुत हो गया.'
फिर तो मेरे भाइयों,
वो बहुत ही बिगड़ गया.
बोला मुझको डपट कर,
रहिये अपनी औकात में,
ये बयान बहुत हो गया!
ताने सीना, लाल आँखें,
लाल बत्ती कार में
तमतमाते चल दिया.
ज़कात की फिराक में
मस्जिद में जमात में
कौम की हर बात में
हर दम यही वो कहता था
गरीब हूँ यतीम हूँ
पर कौम के करीब हूँ .
फिर एक बात और थी
तुम से और हम से वोह
यकीनन बहुत ज़हीन था.
जब कौम ने मांगी दुआ,
वो जल्द लीडर बन गया
फिर एक दिन मिनिस्टर भी हो गया
कौम का भी हौसला बुलंद बहुत हो गया.
घरवालों का भी जोर से सीना तन गया.
मालाओं, दस्तारबंदी, कोरमे की भीड़ में,
दुआ सबकी काम आई, ये वो भी कहता था.
कौम का हमदर्द था पर ज़ल्दी रंग बदल गया.
खुद फोन पहले करता था
अब फोन ही बदल लिया !
हराम और हलाल में
जुल्म और इंसाफ में
दोस्त और दलाल में
फरक ही सारा भूल गया!
केवल खुदकी धुन में
जी जान से वोह लग गया.
कौम का हमदर्द था
पक्का लीडर बन गया.
गरीब था यतीम था
वो कौम का रकीब था.
कौम का हमदर्द था
खुदगर्ज लीडर बन गया.
तुनक गया, जनाब, दिन एक
सवाल ये जो पूछ लिया
'क्या हो गया सरकार को
क्यों दंगा, जनाब, फिर हो गया?'
झुँझला के बोला जोर से, '
तो उसमें क्या हो गया?'
मैंने धीरे से कहा,
'घर बहुत सारे ज़ल गए
बेवायें कई हो गयीं
मासूम अनाथ होगये
जनाब, ये ज़ुल्म बहुत हो गया.'
फिर तो मेरे भाइयों,
वो बहुत ही बिगड़ गया.
बोला मुझको डपट कर,
रहिये अपनी औकात में,
ये बयान बहुत हो गया!
ताने सीना, लाल आँखें,
लाल बत्ती कार में
तमतमाते चल दिया.
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