Tribute to 'Damini'
(Some Thoughts on Horrific Delhi Gang Rape
on December 16, 2012)
इन अंधियारों के लोगो को कुछ दिखता नहीं
यारों इनको अब सूरज दिखाना ही चाहिए।
इन गैर जिम्मेदरान गैर-जमाने के लोगों को
कुछ समझ आता नहीं
वक्त आगया है अब इनको
कुछ तो पढ़ाना और समझाना चाहिए।
गुफाओं और कंदराओं के प्राचीन लोग
खुदगर्जी के मक्कड़जालों में उलझे सब
इनको अब गंगा मैं तैराना
और शहरी सड़क पर घुमाना ही चाहिए।
धर्म के इन ठेकेदारों को
अब भी न दिखता है न सुनता है
इनको हर गली और चौक में लाकर
नए जमाने की शक्ल और अक्ल
का नजारा दिखाना और बराबरी का तराना
सुनाना ही चाहिए।
जमाना आगया है बेटी, बहन और बहू
के हक़ और उम्मिदों के लिए
हर नेक इंसान को
जमीं हिन्द पे जंग छेडना ही चाहिए।
(Some Thoughts on Horrific Delhi Gang Rape
on December 16, 2012)
इन अंधियारों के लोगो को कुछ दिखता नहीं
यारों इनको अब सूरज दिखाना ही चाहिए।
इन गैर जिम्मेदरान गैर-जमाने के लोगों को
कुछ समझ आता नहीं
वक्त आगया है अब इनको
कुछ तो पढ़ाना और समझाना चाहिए।
गुफाओं और कंदराओं के प्राचीन लोग
खुदगर्जी के मक्कड़जालों में उलझे सब
इनको अब गंगा मैं तैराना
और शहरी सड़क पर घुमाना ही चाहिए।
धर्म के इन ठेकेदारों को
अब भी न दिखता है न सुनता है
इनको हर गली और चौक में लाकर
नए जमाने की शक्ल और अक्ल
का नजारा दिखाना और बराबरी का तराना
सुनाना ही चाहिए।
जमाना आगया है बेटी, बहन और बहू
के हक़ और उम्मिदों के लिए
हर नेक इंसान को
जमीं हिन्द पे जंग छेडना ही चाहिए।
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